श्राद्धा (6)प्यार लुटाने को हो प्रस्तुतनहीं छिपा रखने की है वस्तुडुबा प्रियतम को इसमे इतनारहे आसक्ति - मदिरा मे सुप्तभ्रमित नहीं तब हो पाएगासमस्त अहं उड़न-छू हो जाएगाश्राद्धा प्रेम - भावों की अपनाकरनर्क - सा जीवन पाओगे लुप्त