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Meri Rachanain
श्राद्धा (8 )
खंडित ख्वाबों के कण- कण में दिखी न तनिक व्याकुल रेखाएँ पर दुखित मानव मन इतना कि द्रग से झर - झर बह आंसूं आए
मैं, मेरा के भावों से हो ग्रस्त हुए आज हम विपदाओं से त्रस्त
भूल अहं भावों को तू अब रम कर श्राद्धा में मस्त हो जाए
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