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Meri Rachanain
श्राद्धा
(9)
मेरे देवालय, तेरे मस्जिद उनके चर्च , गुरुद्वारे भी यहाँ अपनों मे ये श्राद्धा भी कैसी रहते नत - मस्तक सभी यहाँ
कर, बिस्त्रत कर, स्व-श्राद्धा और भेद-भाव से तब लेगा मुँह मोड़
भुला सभी धर्मों का उपहास जोड़े मानव से मानव यही यहाँ
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