श्रद्धा (10)जीवन - दुख को भले भुला दो कुछ क्षण को , पी कर ये हालाउतरेगी जब ये, तो विस्म्रत दुखखूब सताएंगी बन के ज्वालाएक रमा ले मन में श्रद्धाजग मे कहलाएगा मतवालातन - मन पर क्या कर पाएगीतब, दुख-द्वेष-क्लेश की ज्वाला